दीपक की आत्मकथा (Autobiography of an oil lamp)

मैं धरती- पूत, अग्नि-पूत

अग्नि का ही निवास हूँ,

मुझे अम्बर से क्या?

अपने छोटे- से संसार का

उजाला बनकर संतुष्ट हूँ मैं ।

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