क्या कोई कविता…

उस दिन जब दुनिया ने मिलकर

प्रेम-पर्व मनाया था ,

नफ़रत ने भी पुलवामा पर

मायाजाल फैलाया था।

चाहे उन कायरों को संपूर्ण देश की

बद्दुआ लग जाएगी,

पर क्या कोई कविता उस माँ का

आँचल फिर भर पाएगी ?

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